ऑफिस ट्रेनिंग -1

Office training-1:
indian sex stories दोस्तों कैसे हैं आप सभी ? मैं आशा करती हूँ कि आप सभी बहुत अच्छे होंगे | मेरा नाम शबीना है और मैं फतहपुर की रहने वाली हूँ | मेरी उम्र 26 साल है और मैं एक बैंक मेनेजर हूँ | मैं दिखने में गोरी हूँ और मेरा फिगर उतना तो खास नहीं है पर मैं खुद को दूसरो से अच्छा समझती हूँ क्यूंकि मैं एक सरकारी कर्मचारी हूँ | मेरे दूध संतरे के अकार के हैं और मेरी गांड भी ज्यादा बड़ी नहीं है और मेरी हाईट 5 फुट 7 इंच है और पतली दुबली हूँ | पर मैं अपने आप में कभी ये नहीं समझती कि कभी निराश नहीं होती बल्कि मैं इस चीज़ में गुरूर खाती हूँ कि मैं एक सरकारी कर्मचारी हूँ | दोस्तों आज जो मैं आप लोगो के सामने अपनी कहानी पेश करने जा रही हूँ ये मेरी पहली कहानी है और मेरे जीवन की एक दम सच्ची घटना है | मैं उम्मीद करती हूँ कि आप सभी को मेरी ये कहानी जरुर पसंद आयगी और आप लोगो को मेरी ये कहानी पसंद आप लोग उत्तेजित हो उठोगे | कहानी शुरू करने से पहले मैं ये जानना चाहती हूँ कि ऐसा क्या है कि तो अब मैं आप लोगो का ज्यादा समय ना लेते हुए सीधा अपनी कहानी पर आती हूँ |

ये घटना तब की है जब मैं नयी नयी जॉब मैं आई थी | अब नयी जॉब थी तो मुझे ट्रेनिंग के लिए नयी नयी जगह जाना पड़ता था | वैसे मेरा घर फतहपुर में है पर मेरी पोस्टिंग भोपाल में हुई और ट्रेनिंग के लिए मुझे इनडोर जाना पड़ा | ट्रेनिंग में मुझे एक रूम मिला पर जो न्यू भरती वाले थे सबकी ट्रेनिंग एक साथ होनी थी तो हम सब एक ही होटल में रुके | हम करीब 3 लड़कियां और 5 लड़के थे | जैसा कि मैंने कहा कि मैं दिखने में उतनी आकर्षण तो नहीं थी इसीलिए मुझे कोई लाइन नहीं देता था | मेरी चूत की सील साइकिल चलाने से वैसे ही खुल चुकी थी लेकिन मैंने कभी नहीं चुदवाया | मैं कोई चुदक्कड तो नहीं हूँ पर मुझे कई बार चुदवाना पड़ा | हमारी ट्रेनिंग के दौरान जो मेरे साथ के लड़के थे वो झारखण्ड से आये थे उसका नाम सब्बीर है और उनकी कदकाठी तो बहुत ही अच्छी है | उनको देख के ऐसा लगता है जैसे वो कोई पहलवान हो | मेरी ट्रेनिंग दो महीने की थी तो मुझे दो महीने अपने घर से दूर रहना पड़ा | अब मेरी ट्रेनिंग के पहला दिन तो ठीक निकला और डिनर के टाइम पर हम सब को एक साथ डिनर करना होता था | उस समय हमारे बॉस अशोक जी उन्होंने एक प्रोग्राम रखा जिसमे कवितायेँ, कहानिया, गाना, डांस, इत्यादि शामिल था | अब वो पल भी आ गया | हम सब डिनर कर रहे थे कि मेरे साथ जो लड़की रुकी रूचि उसने कहा कि मैं एक कविता पेश करती हूँ | वो कविता बोलने लगी और सभी उसका साथ देने लगे | हम सभी को उसकी कविता पसंद आई और ऐसे ही लाइन से सबने अपने अपने गाने वगरह वगरह पेश किये | अब बारी मेरी थी तो मैंने एक आशा भोसले जी का गाना सुनाया जिसे सुन कर सभी बहुत प्रभावित हुए और उनके कहने पर मैंने 5-6 सॉंग और गा दिए |

सब मुझसे बहुत खुश थे पर एक ऐसा भी था जो मुझसे बहुत ज्यादा खुश था उसका नाम शहनवाज खान है और वो भी बैंक में सीनियर मेनेजर है | वो मुझे देख कर ऐसा रियेक्ट करता था जैसे मानो वो मुझे नजरो से ही खा जायगा | मैं सब्बीर को पसंद करती थी लेकिन मेरे मन में शहनवाज भी आता था | अगले दिन ट्रेनिंग खत्म हुई और फिर हम सब अपने रूम में आये | फिर रात में डिनर करने के लिए बैठ ही रहे थे कि शहनवाज ने मेरे पास पनी कुर्सी खिसका लिया जिससे मेरे पास कोई और ना बैठ सके क्यूंकि दूसरी तरफ मेरी रूममेट रूचि बैठी थी | फिर हम डिनर करने लगे और ऐसे ही नोर्मल एक दुसरे से बात कर रहे थे कि शहनवाज ने मुझसे पूछा ओअर कैसा चल रहा है ट्रेनिंग का दिन ? तो मैंने भी कहा अच्छा चल रहा है आप बताइये ? तो उन्होंने कहा अच्छा ही चल रहा है | फिर हम दोनों कि ऐसे ही बात हो रही थी कि उन्होंने पूछा कल क्या कर रही हो ? ( दरसल अगले दिन सन्डे का था ) मैंने उनसे कहा कि कल तो मैं आराम से सो कर उठूंगी और फिर अपने पूराने कपड़े धो कर फुर्सत हूँगी | फिर उन्होंने कहा कि अगर बुरा न मानो तो कल हम कही घुमने चले फिर मूवी देखेंगे और साथ डिनर कर के होटल लौट आयेंगे | मुझ पर कोई लाइन नहीं मार रहा था और जब मुझे सामने से ही लाइन मिल रही थी तो मैं कैसे मना कर सकती थी | मैंने तुरंत हाँ कर दी और कहा कि ये बात किसी और को नहीं पता चलनी चाहिए | उसने भी मुझसे वादा किया की नहीं पता चलेगा | फिर अगले दिन मैं शाम को 4 बजे फ्री हुई और रूम से बाहर निकली तो देखा कि सामने शहनवाज खड़ा है | उन्होंने तुरंत ही पूछा रेडी हो गए आप ? तो मैंने कहा हाँ मैं रेडी हूँ चलिए | फिर हम दोनों ने ऑटो बुक की और फिर वहां से मॉल गए | वहां पर हमने कुछ कपड़े लिए और फिर मूवी देखने लगे वहीँ पर | जब हम थिएटर पंहुचे तो देखा वहां कुछ ही लोग थे जो कि कुछ आगे वाली सीट पर थे और कुछ बी बीच वाली | बाकी एक कपल था जो सेकंड लास्ट वाली सीट पर था | हम एक दम लास्ट बैठे हुए थे | अब उन्होंने मुझे हॉलीवुड मूवी दिखाने ले गए थे जो मुझे बिलकुल पसंद नहीं थी पर फिर भी उनके कहने पर मैं गई थी | मूवी देखते देखते मेरा मन कहीं और भटक रहा था कि वो कुछ करे मेरे साथ पर शायद वो डर रहे थे इस वजह से कुछ नहीं कर पा रहे थे | मैंने जान बुझकर उनके हाँथ के ऊपर अपना हाँथ रखा जिससे उन्हें थोड़ी हिम्मत आई तो उन्होंने मेरे गले पर हाँथ डाल दिया | उसके बाद उन्होंने मेरे गाल पर किस किया जिससे मैं थोड़ी उत्तेजित हो गयी | फिर उन्होंने मेरे दूध पर हाँथ फेरना शुरू किया और तो मुझे अच्छा लगने लगा और मेरे मुंह से ऊउम्म्ह आंह उम्म्म्ह आआंह की सिस्कारिया निकलने लगी | मेरा विरोध ना पा कर उनकी हिम्मत थोड़ी और बढ़ गई | फिर उसने मेरे सूट के अन्दर हाँथ डाल दिया और मेरे निप्पलस के साथ खेलने लगा | मैं भी आःह्ह अआहः ऊउम्म्ह उम्म्नंह करते हुए सिस्कारिया निकल रही थी |

कुछ देर बाद एक दम से लाइट जल गई क्यूंकि इंटरवल आ गया था | फिर हम दोनों ने एक दुसरे की तरफ देख कर मुस्कुराया और फिर ऐसे ही चुपचाप बैठे रहे | इंटरवल खत्म होने के बाद हम दोनों फिर अपने मगन हो गये | अब वो मेरे दूध को मसल रहे थे अन्दर हाँथ डाल के और मैंने उनकी चेन खोल कर लंड बाहर निकाल कर हिलाने लगी | वो भी सिस्कारिया भरने लगे | कुछ देर तक हम दोनों ऐसे ही एक दुसरे को सहलाते रहे कि मूवी खत्म हो गई | फिर हम दोनों डिनर करने एक रेस्टौरेंट में गए | जब हम खाना खा रहे थे तो उन्होंने मुझे आई लव यू कहा | मैं चुप रही और वो समझे कि शायद मैं अभी सोच में हूँ तो उन्होंने भी ज्यादा फाॅर्स नहीं किया और हम खाना खाने में लग गए | डिनर करने के बाद हम दोनों अपने होटल गये और अपने अपने रूम में चले गए | मैं रूम में तो थी और थकी हुई भी थी पर मुझे नींद नहीं आ रही थी | मैं मन में ये सोच रही थी कि जो हाल मेरा यहाँ हो रहा है | यही सोचते सोचते मेरी एक ऊँगली चूत में जा कर हलचल मचाने लगी और जब मेरी चूत का रस्खलन हो गया तब अपने आप ही मुझे नींद आ गई | अब अगले दिन हम दोनों एक दुसरे से नजरे चुरा रहे थे | पर लंच टाइम पर उन्होंने मुझसे फिर डिनर साथ में करने के लिए कहा तो मैं भी मना नहीं कर पायी क्यूंकि पिछले दिन की आग अब भी मेरे जिस्म में थी | लेकिन उस दिन कुछ नहीं किया ना ही कहीं गए घुमने बस बाहर डिनर कर के होटल आ गए | जब मैं अपने रूम पंहुची तो रूचि ने मुझसे कहा कि यार मेरी मम्मी की तबियत बहुत ख़राब है तो मुझे तुरंत ही अपने गाँव निकलना है | मैंने कहा ठीक है तुम अपने गाँव निकल जाओ और अपनी मम्मी का अच्छे से ख्याल रखना | उसके बाद वो चली गयी और अब मैं अकली हो गयी |
तो दोस्तों ये थी मेरी अधूरी कहानी | अब मैं अगले भाग में आप लोगो को बताऊंगी की क्या क्या हुआ | मैं उम्मीद करती हूँ की आप सभी को मेरी ये कहानी पसंद आई होगी |


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